लोहड़ी और मकर संक्रांति 2026: आज का पंचांग, महत्व और दुल्ला भट्टी की कहानी | Full Guide

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लोहड़ी और मकर संक्रांति 2026: आज का पंचांग, महत्व और दुल्ला भट्टी की कहानी | Full Guide

लोहड़ी और मकर संक्रांति 2026: परंपरा, आस्था और नई फसलों का महापर्व

भारत को ‘त्योहारों का देश’ कहा जाता है, और जब कड़कड़ाती ठंड के बीच जनवरी का महीना आता है, तो उत्तर से दक्षिण तक पूरा देश उत्सव के रंग में सराबोर हो जाता है। आज 13 जनवरी 2026 है। हिंदू कैलेंडर और भारतीय लोक परंपराओं के अनुसार आज का दिन बेहद खास है। आज पंजाब, हरियाणा और पूरे उत्तर भारत में लोहड़ी का त्योहार मनाया जा रहा है, जबकि कल सूर्य के राशि परिवर्तन के साथ मकर संक्रांति का पावन पर्व मनाया जाएगा।

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इस ब्लॉग में हम जानेंगे कि आज के दिन का धार्मिक, ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है और इसे इतने उत्साह के साथ क्यों मनाया जाता है।


1. आज का पंचांग और तिथि (13 जनवरी 2026)

हिंदू पंचांग के अनुसार, आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की दशमी/एकादशी तिथि का संयोग बन रहा है। लोहड़ी का त्योहार हमेशा पौष माह के अंतिम दिन मनाया जाता है, जो मकर संक्रांति (माघ संक्रांति) से ठीक एक दिन पहले आता है। यह समय ऋतु परिवर्तन का संधिकाल है, जहाँ से शरद ऋतु की विदाई शुरू होती है और बसंत का आगमन होने लगता है।


2. लोहड़ी क्यों मनाई जाती है? (इतिहास और कथाएँ)

लोहड़ी का त्योहार केवल नाच-गाने तक सीमित नहीं है, इसके पीछे गहरी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं:

दुल्ला भट्टी की अमर गाथा

लोहड़ी का नाम आते ही हर किसी की जुबान पर ‘दुल्ला भट्टी’ का जिक्र जरूर आता है। मुगल काल के दौरान दुल्ला भट्टी पंजाब के एक नायक थे। उन्होंने न केवल गरीबों की मदद की, बल्कि अमीर सौदागरों से उन लड़कियों (सुंदरी और मुंदरी) को छुड़ाया जिन्हें गुलाम बनाकर बेचा जा रहा था। उन्होंने उन लड़कियों का कन्यादान किया और उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाया। उन्हीं की याद में आज भी आग के चारों ओर घूमकर लोग गाते हैं:

“सुंदर मुंदरिये हो! तेरा कौन विचारा हो! दुल्ला भट्टी वाला हो!”

कृषि और नई फसल का उत्सव

लोहड़ी मुख्य रूप से किसानों का त्योहार है। इस समय तक खेतों में रबी की फसल (गेहूं और सरसों) लहलहाने लगती है। किसान अग्नि देव का धन्यवाद करते हैं कि उनकी मेहनत रंग लाई है। वे अग्नि में नई फसल के कुछ अंश (तिल, रेवड़ी, मूंगफली) अर्पित कर आने वाले साल के लिए सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।


3. लोहड़ी मनाने की परंपरा: अग्नि और मिलन का प्रतीक

आज रात के समय घर के आंगन या मोहल्ले के चौक पर लकड़ियों का ढेर लगाकर ‘लोहड़ी की आग’ जलाई जाती है। यह अग्नि केवल रोशनी नहीं, बल्कि पवित्रता और ऊर्जा का प्रतीक है।

  • अग्नि पूजन: लोग अग्नि के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और उसमें तिल, गुड़, गजक और मक्का डालते हैं। ऐसा माना जाता है कि इसमें अपनी पुरानी बुराइयां और नकारात्मकता स्वाहा कर देनी चाहिए।
  • लोक नृत्य: ढोल की थाप पर भांगड़ा और गिद्दा किया जाता है, जो आपसी भाईचारे और खुशी को दर्शाता है।
  • प्रसाद: तिल, मूंगफली और गुड़ को ‘तिलचौली’ के रूप में बांटा जाता है, जो सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं।

4. कल है मकर संक्रांति: सूर्य का उत्तरायण होना

लोहड़ी के ठीक अगले दिन यानी कल 14 जनवरी को मकर संक्रांति मनाई जाएगी। खगोल विज्ञान और ज्योतिष के अनुसार, इस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं।

  • उत्तरायण का महत्व: मकर संक्रांति से सूर्य ‘उत्तरायण’ हो जाते हैं, जिसका अर्थ है कि अब दिन लंबे और रातें छोटी होने लगेंगी। सनातन धर्म में उत्तरायण के समय को अत्यंत शुभ माना गया है।
  • भीष्म पितामह का प्रसंग: महाभारत काल में भीष्म पितामह ने अपने प्राण त्यागने के लिए उत्तरायण काल का ही इंतजार किया था, क्योंकि माना जाता है कि इस दौरान मृत्यु होने पर मोक्ष मिलता है।

5. भारत के विभिन्न रूपों में एक उत्सव

यही त्योहार भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों और तरीकों से मनाया जाता है:

  1. तमिलनाडु (पोंगल): यहाँ यह चार दिनों का उत्सव होता है, जिसमें भगवान सूर्य और इंद्र की पूजा की जाती है।
  2. गुजरात (उत्तरायण): यहाँ आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है।
  3. असम (भोगाली बिहू): यहाँ लोग फसल कटाई की खुशी में सामुदायिक भोज का आयोजन करते हैं।
  4. उत्तर प्रदेश/बिहार (खिचड़ी): यहाँ इस दिन खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व है।

6. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ

लोहड़ी और मकर संक्रांति के पकवानों में तिल और गुड़ का इस्तेमाल होता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, जनवरी की कड़ाके की ठंड में शरीर को गर्म रखने के लिए तिल और गुड़ की तासीर बहुत फायदेमंद होती है। तिल में कैल्शियम और गुड़ में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, जो हमारी इम्युनिटी को बढ़ाते हैं।


7. निष्कर्ष (Conclusion)

लोहड़ी और मकर संक्रांति के ये त्योहार हमें प्रकृति के करीब लाते हैं। ये हमें सिखाते हैं कि चाहे कितनी भी कड़कड़ाती ठंड (मुश्किलें) क्यों न हो, अग्नि (हौसले) की गर्माहट और अपनों का साथ हमें खुशियों से भर देता है। आज का दिन नई शुरुआत, पुरानी कड़वाहटों को भुलाने और फसलों की हरियाली का जश्न मनाने का है।

आप सभी को लोहड़ी और आने वाली मकर संक्रांति की ढेर सारी शुभकामनाएं!

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