जाने इसके पीछे की सच्चाई
Thank you for reading this post, don’t forget to subscribe!नई दिल्ली | [22/12/25]:
नई दिल्ली: सोने की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गई हैं। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोना अपने ऑल-टाइम हाई (All-Time High) के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे निवेशकों के साथ-साथ आम लोगों की भी दिलचस्पी बढ़ गई है। बढ़ती महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता और कमजोर होती मुद्राओं के बीच सोना एक बार फिर सुरक्षित निवेश के रूप में उभरा है।

ऑल-टाइम हाई का मतलब क्या है?
ऑल-टाइम हाई का मतलब है कि सोने की कीमत अपने इतिहास की अब तक की सबसे ऊँची स्तर पर पहुँच गई है। यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में आमतौर पर प्रति औंस डॉलर में और भारत में प्रति 10 ग्राम रुपये में तय होती है। रुपये और डॉलर के भाव में उतार-चढ़ाव के कारण भारत में सोने की कीमत अलग रिकॉर्ड बना सकती है।
सोने की कीमत क्यों बढ़ रही है?
विशेषज्ञों के अनुसार सोने की कीमतों में तेजी के पीछे कई कारण हैं।
सबसे बड़ा कारण महंगाई का दबाव है। जब महंगाई बढ़ती है, तो पैसों की क्रय शक्ति घटती है। ऐसे में लोग अपनी बचत को सुरक्षित रखने के लिए सोने में निवेश करना पसंद करते हैं।
दूसरा अहम कारण वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता है। दुनिया के कई हिस्सों में चल रहे युद्ध, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक मंदी की आशंका ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इसका सीधा फायदा सोने को मिल रहा है।
क्यों बढ़ रही हैं सोने की कीमतें? (मुख्य कारण)
सोने की कीमतों में इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे कोई एक कारण नहीं, बल्कि कई वैश्विक और घरेलू कारक जिम्मेदार हैं:
क. भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions)
जब भी दुनिया में युद्ध या अनिश्चितता का माहौल होता है, निवेशक शेयरों (Stocks) से पैसा निकालकर सोने में लगाते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व (Middle East) में जारी संघर्ष ने सोने को ‘सेफ हेवन’ (सुरक्षित निवेश) बना दिया है।
ऐतिहासिक तुलना: 1950 से 2025 तक का सफर
सोने की कीमत में वृद्धि को समझने के लिए इस तालिका पर नजर डालें:
| वर्ष | औसत कीमत (प्रति 10 ग्राम – 24K) |
| 1950 | ₹99 |
| 1990 | ₹3,200 |
| 2010 | ₹18,500 |
| 2020 | ₹48,651 |
| 2023 | ₹65,330 |
| 2024 (अक्टूबर) | ₹80,450 |
| 2025 (दिसंबर) | ₹1,35,000+ |
निवेशकों के लिए सलाह: अब क्या करें?
इतनी ऊँची कीमतों पर सोना खरीदना अक्सर डरावना लग सकता है, लेकिन विशेषज्ञों की ये सलाह आपके काम आ सकती है:
पोर्टफोलियो का 10-15%: अपने कुल निवेश का केवल 10 से 15 प्रतिशत हिस्सा ही सोने में रखें। विविधता (Diversification) जोखिम को कम करती है।
SIP के जरिए निवेश करें: एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय ‘डिजिटल गोल्ड’ या ‘गोल्ड ईटीएफ’ (ETF) में हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश करें।
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): यदि आप गहने नहीं पहनना चाहते, तो सरकारी गोल्ड बॉन्ड सबसे अच्छा विकल्प है क्योंकि इसमें आपको 2.5% सालाना ब्याज भी मिलता है।
क्या 2026 में सोना ₹1.5 लाख पार करेगा? (भविष्य का अनुमान)
विशेषज्ञों और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी अभी थमने वाली नहीं है।
- बुलिश ट्रेंड: यदि वैश्विक तनाव जारी रहता है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अस्थिरता रहती है, तो 2026 के अंत तक सोना ₹1,50,000 प्रति 10 ग्राम के स्तर को चुनौती दे सकता है।
- करेक्शन की संभावना: हर बड़ी तेजी के बाद ‘प्रॉफिट बुकिंग’ होती है। इसलिए निवेशकों को छोटे-मोटे उतार-चढ़ाव (5-7% की गिरावट) के लिए तैयार रहना चाहिए।
निष्कर्ष
सोना केवल एक धातु नहीं, बल्कि भारतीय समाज के लिए सुरक्षा का एक कवच है। 2024-2025 की तेजी ने यह साबित कर दिया है कि संकट के समय आज भी सोना ही सबसे विश्वसनीय साथी है। हालांकि कीमतें अभी अपने शिखर पर हैं, लेकिन लंबी अवधि (Long Term) के लिए सोना हमेशा से एक लाभदायक सौदा रहा है।
जाने अपने एरिया का प्राइस – https://www.goldcalculator.in/







One response
good information