Turkman Gate Violence 2026: क्या था पूरा मामला? दिल्ली पुलिस और सरकार के एक्शन का पूरा सच

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Turkman Gate Violence 2026: क्या था पूरा मामला? दिल्ली पुलिस और सरकार के एक्शन का पूरा सच

नई दिल्ली, 8 जनवरी 2026: दिल्ली का ऐतिहासिक तुर्कमान गेट एक बार फिर चर्चा में है। 6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात यहाँ जो हुआ, उसने 1976 के आपातकाल की यादें ताज़ा कर दीं। भारी पुलिस बल, गरजते बुलडोज़र और फिर अचानक शुरू हुआ पथराव—तुर्कमान गेट की गलियों में तनाव का माहौल आज भी बरकरार है। लेकिन इस हिंसा का असली सच क्या है? क्या वाकई मस्जिद पर खतरा था या यह महज़ एक अफवाह थी? आइए जानते हैं विस्तार से।

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क्या था मामला? (The Incident)

मंगलवार और बुधवार की रात करीब 12:40 बजे, नगर निगम (MCD) की टीम 17 से ज्यादा बुलडोज़र और भारी पुलिस बल के साथ तुर्कमान गेट के पास फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद और कब्रिस्तान से सटे इलाके में पहुँची। यह कार्रवाई दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के पालन में थी, जिसमें रामलीला मैदान के पास करीब 36,000 वर्ग फुट सरकारी ज़मीन से अतिक्रमण (Encroachment) हटाने को कहा गया था।

हिंसा कैसे भड़की? (The Violence)

जैसे ही बुलडोज़रों ने अवैध घोषित किए गए ढांचों को गिराना शुरू किया, इलाके में तनाव फैल गया।

  1. अफवाह का बाज़ार: सोशल मीडिया पर अफवाह उड़ी कि मस्जिद को गिराया जा रहा है।
  2. पथराव और बवाल: देखते ही देखते 150-200 लोगों की भीड़ जमा हो गई। भीड़ ने पुलिस बैरिकेड्स तोड़ दिए और सुरक्षाबलों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं।
  3. पुलिस का एक्शन: स्थिति बेकाबू होते देख दिल्ली पुलिस ने आंसू गैस के गोले (Tear gas) छोड़े और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए बल प्रयोग किया। इस हिंसा में SHO समेत 5 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं।

सरकार और पुलिस का पक्ष (Govt & Police Action)

दिल्ली सरकार और पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है:

  • मस्जिद सुरक्षित है: दिल्ली के गृह मंत्री आशीष सूद और MCD अधिकारियों ने साफ किया कि मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुँचाया गया है। कार्रवाई सिर्फ अवैध कमर्शियल बिल्डिंग्स, एक बैंकट हॉल और एक डिस्पेंसरी पर हुई है।
  • गिरफ्तारियाँ: दिल्ली पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है और कई अन्य को हिरासत में लिया है। बॉडी कैम और ड्रोन फुटेज के ज़रिए दंगाइयों की पहचान की जा रही है।
  • राजनीतिक मोड़: जाँच में समाजवादी पार्टी के सांसद मोहिबुल्लाह नदवी की मौजूदगी की बात भी सामने आई है। पुलिस जाँच कर रही है कि क्या यह हिंसा अचानक हुई या कोई सोची-समझी साज़िश थी।

दिल्ली पुलिस पर उठते सवाल? (Questions on Delhi Police)

स्थानीय निवासियों और एक्टिविस्ट्स ने पुलिस की कार्रवाई पर कुछ गंभीर सवाल खड़े किए हैं:

  • आधी रात का ऑपरेशन: सवाल यह है कि संवेदनशील इलाके में रात के अंधेरे (1:30 AM) में कार्रवाई क्यों की गई? क्या इससे लोगों में डर और अफवाह नहीं फैलती?
  • कोर्ट का नोटिस: स्थानीय लोगों का दावा है कि हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई अप्रैल 2026 के लिए तय की थी, फिर इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई गई?
  • संवेदनशीलता की कमी: क्या प्रशासन स्थानीय ‘अमन कमेटी’ के साथ मिलकर इस मामले को शांति से नहीं सुलझा सकता था?

Fact-Check: तुर्कमान गेट हिंसा के पीछे का ‘सच’ और ‘झूठ’, सोशल मीडिया पर फैलीं इन 3 अफवाहों का पर्दाफाश

नई दिल्ली (खबर फैक्ट्री): तुर्कमान गेट इलाके में हुई हिंसा के बाद सोशल मीडिया (WhatsApp, X और Facebook) पर दावों की बाढ़ आ गई है। कुछ लोग इसे ‘मस्जिद बचाने की लड़ाई’ कह रहे हैं, तो कुछ इसे ‘सांप्रदायिक साजिश’। खबर फैक्ट्री ने इन वायरल दावों की पड़ताल की है। यहाँ जानिए क्या सच है और क्या सिर्फ एक अफवाह।

दावा 1: “फ़ैज़-ए-इलाही मस्जिद को बुलडोज़र से गिरा दिया गया है”

सच्चाई: यह पूरी तरह गलत है। हमारी टीम और ऑन-ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, मस्जिद को खरोंच तक नहीं आई है। प्रशासन की कार्रवाई मस्जिद से सटे उस हिस्से पर थी जिसे दिल्ली हाईकोर्ट ने अतिक्रमण (Encroachment) माना था। इसमें कुछ दुकानें और एक पुराना ढांचा शामिल था। पुलिस और प्रशासन ने बार-बार स्पष्ट किया है कि मस्जिद पूरी तरह सुरक्षित है।

दावा 2: “हाईकोर्ट ने डिमोलिशन पर स्टे (Stay) दिया था, फिर भी पुलिस ने कार्रवाई की”

सच्चाई: यह दावा भ्रामक है। रिकॉर्ड्स के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने इस ज़मीन को सरकारी माना था और इसे खाली करने का आदेश दिया था। स्थानीय निवासियों ने स्टे की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने के ऑपरेशन पर कोई रोक नहीं लगाई थी। पुलिस की कार्रवाई कानूनी रूप से वैध थी, हालांकि “आधी रात” को कार्रवाई करने के समय पर सवाल उठाए जा सकते हैं।

दावा 3: “पुलिस की फायरिंग में दो युवकों की मौत हो गई”

सच्चाई: यह एक खतरनाक अफवाह है। हिंसा के दौरान पथराव और आंसू गैस के गोले छोड़े जाने की खबरें सच हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस या किसी भी अस्पताल ने फायरिंग या मौत की पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने साफ किया है कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए केवल हल्के बल का प्रयोग और आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया था। किसी भी जानमाल के नुकसान की खबर अब तक सामने नहीं आई है।


खबर फैक्ट्री की अपील: अफवाहों से बचें

तुर्कमान गेट जैसे संवेदनशील इलाकों में एक छोटी सी अफवाह बड़े दंगे का रूप ले सकती है। हमारी टीम पाठकों से अपील करती है कि:

अमन और शांति बनाए रखें।

किसी भी न्यूज़ वीडियो को फॉरवर्ड करने से पहले उसकी तारीख और जगह की पुष्टि करें।

‘मस्जिद गिराने’ या ‘फायरिंग’ जैसे संवेदनशील दावों पर बिना आधिकारिक पुष्टि के यकीन न करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

तुर्कमान गेट की घटना प्रशासन की सख्ती और जनता के अविश्वास के बीच की एक बड़ी खाई को दर्शाती है। जहाँ सरकार इसे ‘कोर्ट का आदेश’ बता रही है, वहीं स्थानीय लोग इसे अपनी पहचान और संपत्ति पर हमला मान रहे हैं। फिलहाल पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है और सुरक्षा बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं।

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सवाल: “तुर्कमान गेट की घटना पर आपकी क्या राय है? क्या प्रशासन का ‘आधी रात’ को बुलडोज़र चलाना सही फैसला था या इसे दिन के उजाले में शांति से किया जा सकता था?”

Poll Options:

  1. ✅ रात की कार्रवाई सही थी (ताकि भीड़ न जुटे)।
  2. ❌ गलत थी, इससे डर और अफवाह फैलती है।
  3. ⚖️ कोर्ट का आदेश है, समय मायने नहीं रखता।