सोने की कीमतों में भारी गिरावट क्या है इसकी सच्चाई जाने पूरी खबरे?
पिछले कुछ समय से ‘पीली धातु’ (सोना) निवेशकों की पहली पसंद बनी हुई थी, लेकिन हाल के दिनों में इसमें जो करेक्शन (Correction) देखने को मिला है, उसने बाजार में खलबली मचा दी है। जहाँ निवेशक इसे सोने की कीमतों का गिरना मान रहे हैं, वहीं बाजार के दिग्गज इसे एक “Healthy Correction” करार दे रहे हैं।
Thank you for reading this post, don’t forget to subscribe!क्या है इस गिरावट की असली वजह?
सोने की कीमतों में यह गिरावट अचानक नहीं आई है, इसके पीछे कुछ ठोस अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारण हैं:
केंद्रीय बजट और आयात शुल्क (Import Duty): भारत में बजट सत्र के दौरान अक्सर सोने पर लगने वाले टैक्स और ड्यूटी में बदलाव की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार में अस्थायी सुस्ती आ जाती है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती: जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो सोने की कीमतों में अक्सर गिरावट आती है। वर्तमान में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के सकारात्मक आंकड़ों ने डॉलर को मजबूती दी है।
ब्याज दरों का खेल: वैश्विक बैंकों (खासकर US Fed) के रुख में बदलाव और ब्याज दरों के ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना ने सोने की मांग को थोड़ा कम किया है।
मुनाफावसूली (Profit Booking): जब सोना अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, तब बड़े संस्थागत निवेशकों ने भारी मात्रा में बिकवाली की ताकि वे अपना मुनाफा सुरक्षित कर सकें।
आइए जानते है इतिहास क्या कहता है गोल्ड के बारे में
यदि हम सोने के पिछले 10 सालों के चार्ट को देखें, तो सोने ने कभी भी एक सीधी रेखा में वृद्धि नहीं की है। कीमतें अक्सर एक नया हाई बनाने के बाद थोड़ा नीचे आती हैं ताकि बाजार को स्थिरता मिल सके।
“सोना हमेशा से लंबी अवधि (Long-term) के लिए सबसे सुरक्षित निवेश माना गया है। अल्पकालिक (Short-term) गिरावट इसकी चमक को कम नहीं कर सकती।”

निवेशकों के लिए चेकलिस्ट (Tips for Investors)
अगर आप इस समय सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो इन 3 बातों का ध्यान जरूर रखें:
घबराएं नहीं: बाजार की इस अस्थिरता को देखकर पैनिक सेलिंग (डर में आकर बेचना) न करें। सोना पोर्टफोलियो को बैलेंस करने का काम करता है।
शादी-ब्याह की खरीदारी: यदि घर में शादी है, तो इस गिरावट का फायदा उठाना एक समझदारी भरा फैसला होगा।
डिजिटल गोल्ड बनाम फिजिकल गोल्ड: निवेश के उद्देश्य से हॉलमार्क वाले सिक्के या Sovereign Gold Bonds (SGB) ज्यादा बेहतर विकल्प हैं क्योंकि इनमें शुद्धता की गारंटी और अतिरिक्त ब्याज मिलता है।

क्या कहती है गिरावट की सच्चाई?
कई लोग इसे सोने का “बबल” (Bubble) फटना कह रहे हैं, लेकिन हकीकत कुछ और है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी एसेट की कीमत जब एक सीधी रेखा में ऊपर जाती है, तो उसमें 5% से 10% का करेक्शन आना स्वाभाविक और स्वस्थ माना जाता है।
“यह गिरावट सोने की चमक कम होने का संकेत नहीं है, बल्कि बाजार के संतुलन (Market Balancing) की एक प्रक्रिया है।”
सोने और चांदी के ताजा रेट (30 जनवरी 2026 के अनुसार)
| धातु | शुद्धता | गिरावट (लगभग) | वर्तमान भाव (प्रति 10 ग्राम/किलो) |
| सोना | 24 कैरेट (99.9%) | ₹11,000 ↓ | ₹1,59,984 |
| सोना | 22 कैरेट (91.6%) | ₹10,000 ↓ | ₹1,46,000 |
| चांदी | 99.9% | ₹68,000 ↓ | ₹3,34,503 |
(नोट: ये कीमतें बाजार के उतार-चढ़ाव के आधार पर बदल सकती हैं और इनमें GST शामिल नहीं है।
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निवेशकों के लिए सलाह: अब क्या करें?
अगर आप सोना खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- धीरे-धीरे खरीदें (SIP Mode): अगर आप लंबी अवधि के लिए निवेश करना चाहते हैं, तो इस गिरावट का फायदा उठाएं। सारा पैसा एक साथ न लगाकर किस्तों में खरीदारी करें।
- डिजिटल गोल्ड और ETF: गहनों के बजाय गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF) या सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा सुरक्षित और फायदेमंद हो सकता है क्योंकि इसमें मेकिंग चार्ज का झंझट नहीं होता।
- हड़बड़ी में न बेचें: यदि आपने ऊंचे दामों पर सोना खरीदा है, तो घबराकर उसे सस्ते में न बेचें। सोने का इतिहास रहा है कि यह हर गिरावट के बाद एक नई ऊंचाई छूता है।
अगला कदम क्या होगा?
बाजार के जानकारों का अनुमान है कि यह गिरावट ज्यादा लंबी नहीं चलेगी। जैसे ही वैश्विक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता दोबारा उभरेगी, सोने की कीमतों में फिर से उछाल आ सकता है।
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