Indore Contaminated Water Death Update: कांग्रेस-बीजेपी कार्यकर्ताओं में भिड़ंत, राहुल गांधी का हमला, कई अधिकारी सस्पेंड।
Indore Water Tragedy: ‘सबसे स्वच्छ शहर’ में गंदा पानी पीने से कोहराम! कांग्रेस का भारी प्रदर्शन, BJP कार्यकर्ताओं से भिड़ंत और भारी बवाल
इंदौर डेस्क, खबर फैक्ट्री | 3 जनवरी 2026:
Thank you for reading this post, don’t forget to subscribe!देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर (Indore) से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। शहर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura) इलाके में दूषित पानी (Contaminated Water) पीने से हुई मौतों के बाद अब सियासत गरमा गई है। शुक्रवार को कांग्रेस ने नगर निगम और राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया, जिसके बाद भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच जमकर भिड़ंत और पथराव की खबरें सामने आई हैं।
जहाँ सरकारी आंकड़े 6 मौतों की पुष्टि कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस का दावा है कि अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और क्यों मचा है इतना बवाल?
1. क्या है पूरा मामला? (The Tragedy)
इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में पिछले 10 दिनों से गंदे पानी की सप्लाई हो रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन में सीवर का पानी मिक्स हो गया था।
- बीमारी का तांडव: दूषित पानी पीने से इलाके के करीब 2,800 लोग बीमार पड़ गए हैं।
- अस्पताल में भीड़: 200 से ज्यादा लोग अब भी अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें से 34 मरीज आईसीयू (ICU) में अपनी जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
- जांच रिपोर्ट: मेडिकल कॉलेज की जांच में 26 पानी के सैंपल्स में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं।
2. कांग्रेस का प्रदर्शन और भारी बवाल
शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने इंदौर नगर निगम मुख्यालय का घेराव किया।
- नारेबाजी और भिड़ंत: कांग्रेस कार्यकर्ता नगर निगम के अंदर घुसने की कोशिश कर रहे थे, तभी वहां मौजूद भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ उनकी तीखी बहस हो गई। देखते ही देखते दोनों गुटों के बीच धक्का-मुक्की और पत्थरबाजी शुरू हो गई।
- पुलिस की कार्रवाई: स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा और कई कांग्रेसी कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
- पुतला दहन: भोपाल में यूथ कांग्रेस ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का पुतला गंदे पानी में डुबोकर अपना विरोध दर्ज कराया।
3. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे का हमला
दिल्ली से कांग्रेस के बड़े नेताओं ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सीएम मोहन यादव को घेरा है।
- राहुल गांधी: उन्होंने कहा, “इंदौर में पानी नहीं, जहर बांटा गया है और प्रशासन कुंभकर्णी नींद में सोया है। जब गरीब मरते हैं, तो मोदी जी चुप रहते हैं।”
- मल्लिकार्जुन खड़गे: खड़गे ने सवाल उठाया कि 8 बार के ‘सबसे स्वच्छ शहर’ का यह हाल कैसे हो गया? क्या भाजपा सरकार जनता को साफ पानी भी नहीं दे सकती?

4. सरकार का एक्शन: कई अधिकारी सस्पेंड
बवाल बढ़ता देख मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया है:
- नगर निगम कमिश्नर का तबादला: इंदौर नगर निगम कमिश्नर दिलीप कुमार यादव को पद से हटा दिया गया है।
- निलंबन (Suspension): एडिशनल कमिश्नर रोहित सिसोनिया और PHE विभाग के इंजीनियर संजीव श्रीवास्तव को सस्पेंड कर दिया गया है।
- मुआवजा: सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹2-2 लाख की आर्थिक सहायता और घायलों के मुफ्त इलाज की घोषणा की है।
5. भाजपा का पक्ष और ‘अहंकारी’ बयान का विवाद
इस संकट के बीच कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के एक बयान ने आग में घी डालने का काम किया। एक पत्रकार द्वारा मौतों पर सवाल पूछे जाने पर उन्होंने कैमरे के सामने एक ‘अपमानजनक शब्द’ का इस्तेमाल किया, जिसे लेकर कांग्रेस ने उन्हें “सत्ता के नशे में चूर” बताया है। हालांकि, बाद में उन्होंने इस पर खेद व्यक्त किया।

निष्कर्ष: सिस्टम की विफलता?
इंदौर की यह घटना बताती है कि सिर्फ पुरस्कार जीतना काफी नहीं है, बुनियादी सुविधाओं (जैसे साफ पानी) की अनदेखी जानलेवा हो सकती है। भागीरथपुरा के लोगों का सवाल है—“क्या हमारे अपनों की जान की कीमत सिर्फ ₹2 लाख है?”
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