NSE F&O से बाहर होगा IRCTC: बड़े और छोटे निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?

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NSE F&O से बाहर होगा IRCTC: बड़े और छोटे निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं?

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NSE के IRCTC को F&O (वायदा और विकल्प) सेगमेंट से हटाने के फैसले का असर निवेशकों की डेरिवेटिव पोजीशन और स्टॉक की भविष्य की लिक्विडिटी (तरलता) पर पड़ेगा।

अपडेटेड: 23 दिसंबर, 2025 12:23 PM IST

द्वारा: HT बिजनेस डेस्क

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने 25 फरवरी 2026 से प्रभावी रूप से IRCTC Ltd. को F&O सेगमेंट से हटाने का निर्णय लिया है। इसे भारत के डेरिवेटिव बाजार में सबसे लोकप्रिय सार्वजनिक क्षेत्र के शेयरों में से एक के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

IRCTC रेल मंत्रालय के तहत एक मिनी रत्न PSU है। (HT)

इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्प लिमिटेड (IRCTC) को F&O शेयरों की सूची से हटाना कोई ‘प्रतिबंध’ (Ban) नहीं है, बल्कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग से स्थायी निष्कासन है। निवेशकों और स्टॉक के लिए इसके अर्थ यहाँ दिए गए हैं:

  1. कोई नए अनुबंध नहीं: 25 फरवरी 2026 की एक्सपायरी के बाद, IRCTC के लिए कोई नए मासिक या त्रैमासिक F&O कॉन्ट्रैक्ट पेश नहीं किए जाएंगे। मार्च 2026 के बाद के मौजूदा अनुबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा। ट्रेडर्स अब डेरिवेटिव सेगमेंट में नई ‘लॉन्ग’ (खरीद) और ‘शॉर्ट’ (बिक्री) पोजीशन शुरू नहीं कर पाएंगे।
  2. कैश मार्केट में बदलाव: एक बार जब IRCTC F&O शेयरों की सूची से बाहर हो जाएगा, तो इसका कारोबार पूरी तरह से “कैश” या “इक्विटी” सेगमेंट तक सीमित हो जाएगा। इसका मतलब है कि निवेशक केवल IRCTC के वास्तविक शेयर ही खरीद या बेच सकेंगे। “लीवरेज” के साथ ट्रेड करने की सुविधा—जहाँ आप कम मार्जिन के साथ शेयरों के बड़े मूल्य को नियंत्रित करते हैं—इस स्टॉक के लिए समाप्त हो जाएगी।

3. अस्थिरता और तरलता में कमी: F&O में शामिल शेयरों में सट्टेबाजी की गतिविधियों के कारण अक्सर ट्रेडिंग वॉल्यूम (व्यापार की मात्रा) बहुत अधिक होती है और कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा जाता है। डेरिवेटिव सेगमेंट से बाहर होने के बाद, सट्टेबाजी वाला “शोर” (Speculative Noise) कम हो जाता है, जिससे शेयर की कीमतों में स्थिरता आती है। हालांकि, इससे कुल ट्रेडिंग लिक्विडिटी (तरलता) में भी गिरावट आ सकती है, क्योंकि हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स दूसरे F&O शेयरों की ओर रुख कर सकते हैं।

4. हेजिंग पर प्रभाव: संस्थागत निवेशक (Institutional Investors), जिनके पास IRCTC के शेयरों की बड़ी मात्रा होती है, वे अब स्टॉक की कीमतों में अचानक आने वाली गिरावट से अपने पोर्टफोलियो को बचाने के लिए “पुट ऑप्शन” (Put options) या “फ्यूचर्स” (Futures) का उपयोग नहीं कर पाएंगे।


F&O ट्रेडिंग क्या है?

यहाँ यह समझाना महत्वपूर्ण है कि वास्तव में F&O का मतलब क्या है।

F&O का अर्थ है फ्यूचर्स और ऑप्शंस (वायदा और विकल्प) ये “डेरिवेटिव” अनुबंध हैं, जिसका अर्थ है कि इनका मूल्य किसी अंतर्निहित संपत्ति (Underlying Asset) से प्राप्त होता है—इस मामले में, IRCTC के शेयर।

  • फ्यूचर्स (Futures): यह एक अनुबंध है जहाँ आप भविष्य की एक निश्चित तारीख पर पूर्व-निर्धारित कीमत पर स्टॉक खरीदने या बेचने के लिए सहमत होते हैं। यह आपको इस बात पर दांव लगाने की अनुमति देता है कि स्टॉक ऊपर जाएगा या नीचे।
  • ऑप्शंस (Options): ये आपको एक विशिष्ट कीमत पर स्टॉक खरीदने या बेचने का अधिकार देते हैं—लेकिन इसकी बाध्यता (Obligation) नहीं। इनका उपयोग अक्सर नुकसान से बचने के लिए “बीमा” (Insurance) के रूप में या सीमित पूंजी के साथ त्वरित लाभ कमाने के लिए किया जाता है।

संक्षेप में, F&O ट्रेडर्स को कुल पैसे के केवल एक छोटे हिस्से (जिसे लीवरेज कहते हैं) का उपयोग करके बड़ी मात्रा में ट्रेड करने की अनुमति देता है। यही कारण है कि कैश मार्केट में शेयर खरीदने की तुलना में यह एक उच्च-जोखिम और उच्च-प्रतिफल (High-risk, High-reward) वाला सेगमेंट है।

IRCTC का F&O से बाहर होना: निवेशकों पर असर का विश्लेषण

जब कोई शेयर F&O (Futures & Options) से बाहर होता है, तो बाज़ार में उसकी चाल और निवेशकों की रणनीति पूरी तरह बदल जाती है। इसके मुख्य प्रभाव इस प्रकार हैं:

1. अस्थिरता (Volatility) में कमी

F&O में होने के कारण IRCTC के शेयर में सट्टेबाजी (Speculation) अधिक होती थी, जिससे दाम बहुत तेज़ी से ऊपर-नीचे होते थे। अब शेयर की चाल अधिक स्थिर हो जाएगी और यह पूरी तरह से कंपनी के वास्तविक प्रदर्शन और कैश मार्केट की खरीद-बिक्री पर निर्भर करेगा।

2. कम हो जाएगी लिक्विडिटी (Liquidity)

बड़े संस्थागत निवेशक (जैसे म्यूचुअल फंड और विदेशी निवेशक) अक्सर उन शेयरों को पसंद करते हैं जो F&O में होते हैं क्योंकि वहाँ वे अपनी पोजीशन को ‘हेज’ (Hedge) कर सकते हैं। F&O से बाहर होने पर, ट्रेडिंग वॉल्यूम कम हो सकता है, जिससे बड़े सौदे करने में थोड़ी कठिनाई आ सकती है।

3. छोटे निवेशकों (Retail Investors) के लिए झटका

  • लीवरेज का खत्म होना: छोटे ट्रेडर्स कम पैसों में बड़े लॉट खरीदकर मुनाफा कमाने की कोशिश करते थे, अब वे ऐसा नहीं कर पाएंगे। उन्हें अब एक-एक शेयर की पूरी कीमत चुकानी होगी।
  • इंट्राडे तक सीमित: जो लोग ऑप्शंस ट्रेडिंग से पैसा बनाना चाहते थे, उनके लिए अब IRCTC एक विकल्प नहीं रहेगा।

4. शॉर्ट सेलिंग पर पाबंदी

F&O में निवेशक शेयर के गिरने पर भी पैसा कमा सकते थे (Short Selling करके पोजीशन को अगले दिन तक ले जाना)। अब, निवेशक केवल ‘इंट्राडे’ में ही शॉर्ट सेलिंग कर पाएंगे। यदि उन्हें शेयर को होल्ड करना है, तो वे केवल खरीदकर (Buy and Hold) ही चल सकते हैं।

5. शेयर की कीमत पर क्या असर होगा?

आमतौर पर देखा गया है कि जब कोई शेयर F&O से बाहर होता है, तो शुरुआत में उसमें थोड़ी गिरावट आती है क्योंकि आर्बिट्राजर्स (Arbitrageurs) और ट्रेडर्स अपनी पोजीशन काटते हैं। लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अच्छी बात हो सकती है क्योंकि अब शेयर केवल फंडामेंटल्स पर चलेगा।


निष्कर्ष (Summary)

निवेशकों के लिए: यह एक सामान्य बात है। यदि आप IRCTC को लॉन्ग-टर्म के लिए पोर्टफोलियो में रखना चाहते हैं, तो इस फैसले से आपकी निवेश यात्रा पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ट्रेडर्स के लिए: यह बुरी खबर है क्योंकि उनके पास सट्टा लगाने और लीवरेज लेने का मौका नहीं रहेगा।

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